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गुरु का महत्व, गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन दर्शन का मार्गदर्शक माना जाता है

FB IMG 1461945678296364776सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान अत्यंत ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल से ही गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन-दर्शन का मार्गदर्शक माना जाता रहा है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह अपने शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करता है और उसे सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज का युग विज्ञान, तकनीक और इंटरनेट का युग है, जहाँ जानकारी की कोई कमी नहीं है। फिर भी सही ज्ञान, उचित मार्गदर्शन और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जाती है। यही कारण है कि आज भी गुरु का महत्व उतना ही है जितना प्राचीन समय में था।
गुरु’ शब्द का अर्थ है-जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाए। गुरु केवल विद्यालय या महाविद्यालय का शिक्षक ही नहीं होता, बल्कि माता-पिता, जीवन में सही मार्ग दिखाने वाले शिक्षक, प्रशिक्षक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक तथा अनुभव से सीख देने वाले वरिष्ठ व्यक्ति भी गुरु के समान होते हैं। आज के समय में विद्यार्थियों के पास इंटरनेट, मोबाइल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) जैसे अनेक साधन उपलब्ध हैं। इनसे जानकारी तो आसानी से मिल जाती है, लेकिन सही और गलत में अंतर करना, ज्ञान का उचित उपयोग करना तथा जीवन में सही निर्णय लेना केवल अनुभवी गुरु ही सिखा सकते हैं। गुरु विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और नैतिकता का विकास करते हैं।
एक सच्चा गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देता, बल्कि अपने आचरण से भी शिक्षा देता है। वह विद्यार्थियों में ईमानदारी, परिश्रम, समय का महत्व, सहनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। गुरु के मार्गदर्शन से विद्यार्थी एक अच्छे नागरिक और सफल व्यक्ति बनते हैं। आज के समय में जब युवा अनेक प्रकार के भ्रम, तनाव और प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं, तब एक योग्य गुरु उन्हें सही दिशा प्रदान करता है। वह केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है।
आज डिजिटल शिक्षा का विस्तार तेजी से हुआ है। ऑनलाइन कक्षाएँ, वीडियो व्याख्यान और विभिन्न शैक्षणिक प्लेटफॉर्म शिक्षा को सरल बना रहे हैं। फिर भी इन साधनों का सही उपयोग करने, विषय को गहराई से समझने और अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक रहता है। तकनीक गुरु का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि गुरु की सहायता करने का एक माध्यम बन सकती है। गुरु और शिष्य का संबंध विश्वास, सम्मान और समर्पण पर आधारित होता है। जब विद्यार्थी अपने गुरु का सम्मान करता है और उनके मार्गदर्शन का पालन करता है, तब वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। गुरु भी अपने शिष्यों की उन्नति को अपना सबसे बड़ा पुरस्कार मानते हैं।
किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यार्थियों पर निर्भर करता है, और विद्यार्थियों का भविष्य उनके गुरुओं के हाथों में होता है। एक योग्य गुरु समाज को शिक्षित, जागरूक और नैतिक नागरिक प्रदान करता है। इसलिए राष्ट्र निर्माण में गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंततः कहा जा सकता है कि आज के आधुनिक और तकनीकी युग में भी गुरु का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि और अधिक बढ़ गया है। जानकारी प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही ज्ञान, उचित मार्गदर्शन और अच्छे संस्कार केवल गुरु ही प्रदान कर सकते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है कि वह अपने गुरु का सम्मान करे, उनके बताए मार्ग पर चले और उनके ज्ञान का सदुपयोग करके अपने जीवन तथा समाज को बेहतर बनाए। वास्तव में, गुरु जीवन का वह प्रकाश हैं जो सफलता, सदाचार और आत्मविकास की राह को प्रकाशित करते हैं।
यह प्रसिद्ध श्लोक गुरु के महत्व को स्पष्ट करता है
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नम।।”
डॉ. नीलिमा पिम्पलापुरे लेखिका, शिक्षाविद समाजसेविका, सागर

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